Last Updated: August 22, 2012

Mantra to Fulfill Desires and Wishes

मनोकामना पूर्ण करने हेतु मंत्र

आज इस धर्म और अधर्म के कल्पित संसार में कई लोग अभी भी भगवान को ही सर्वशक्तिमान मानते है और मानना भी चाहिए क्योकि इस बात में किंचितमात्र भी संदेह नहीं है कि भगवान ही सर्वशक्तिमान है | तथा जो यह मानते है और कहते है कि भगवान नहीं है तो ऐसे मूर्ख और नाराधामी लोगों का जीवन पशु सामान है जो देख और महसूस तो कर पा रहे है पर उस शक्ति-स्वरूप परमात्मा का गुणगान नहीं कर पाते है, तथा इस कलियुग के मायाजाल में बुरी तरह से फंसकर अपना यह जीवन तो नष्ट कर ही रहे है साथ ही साथ परलोक को भी कष्टमय बना रहे है |



अत: मेरे कहने का तात्पर्य यह है कि मानव जीवन कई भागों में विभजित है जहाँ मनुष्य को भोग-योग तथा धर्म-कर्म आदि पर विचारकर ही आगे कदम बढ़ाना चाहिए| यद्यपि हमें इस गृहस्थ जीवन से मोह तो होता ही है, परन्तु गृहस्थ जीवन में रहते हुए भी निष्टावान और प्रभु उपासक बना जा सकता है |

हमें मनोकामना और वर प्राप्ति तथा मनवांछित फल पाने के लिए परमात्मा से अनुरोध करना चाहिए कि :- हे परमपिता परमेश्वर मुझ तुच्छ भक्त पर कृपा करे तथा मेरी मनोकामनाओं को पूर्ण करे |

रामचरितमानस में इस प्रकार कि भक्ति का बड़ा ही सुन्दर वर्णन देखने को मिलता है, जहाँ पर माता सीता कि भक्ति और समर्पणभाव से माता गौरी और देवर्षि नारद जी प्रसन्न हो जाते है और उनकी मनोकामना कि पूर्ति का आश्वाशन देते है | रामचरितमानस में दिए गए इस मंत्र को सिद्ध मंत्रो की श्रेणी में रखा जाता है | यह मंत्र वर प्राप्ति हेतु भी अग्रणी माना जाता है | रामचरितमानस में दिए दृष्टान्त के अनुसार आतिथ्य सत्कार करने से प्रसन्न हो नारद जी ने सीता माता को इसी प्रकार से आशीवाद दिया था तथा माता सीता द्वारा दुर्गा (माँ गौरी) की पूजा करने पर माता गौरी ने उन्हें इस प्रकार आशीर्वाद दिया |


In Hindi:-
सुनुसिय सत्य असीस हमारी |
पूजहिं मनोकामना तुम्हारी ||

In English:-
Sunu Siya Satya Ashisa Hamari |
Pujahin Mano Kamana Tumhari ||

भावार्थ:- यह मंत्र रामचरितमानस के बालकाण्ड से उदृत है तथा इसमें माता पार्वती जी की पूजा करने पर माँ गौरी अर्थात माता पार्वती प्रसन्न होकर माता सीता से कहती है कि, हे सीता तुम्हारी भक्ति और सेवा निष्काम है तथा तुम्हारे विचार अति उत्तम है अत: हे जनकनंदिनी तुम्हारी मनोकामना अवश्य पूर्ण होगी और जो तुम्हे श्रृद्धा भाव से पूजेगा, उसकी मनोकामना भी निसंदेह पूर्ण होगी |

मंत्र जाप विधि:- यह मंत्र रामचरितमानस के सिद्ध मन्त्रों में से एक है और गोस्वामी तुलसीदास जी ने श्रीराम शलाका में भी मनोरथ सिद्धि के लिए इस मंत्र का उल्लेख किया है |
इस मंत्र का जाप करने से पूर्व दस मिनट तक एकाग्रचित्त होकर भगवान श्रीराम और माता सीता का ध्यान करना चाहिए तथा उसके बाद ही इस मंत्र का जप आरंभ करें | मंत्र को प्रतिदिन संध्याकाल में कम से कम 108 बार जपना चाहिए | या हवन कर मंत्र की सिद्धि कर लेनी चाहिए | ऐसा करने से आपकी मनोकामना अवश्य ही सफल होती है |

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